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Saturday, July 13, 2013

घने बादलों से ढकी शाम में

ये घने बादलों से ढकी शाम
उदास गीत की किसी धुन की तरह
जी में आता है इसे गुनगुनाउं
जी में आता है इसे किसी को सुनाउं
एबी रोड पर चलते हुए
मैं रास्तों से बात करता हूं
देखता हूं आस—पास से गुजरते चेहरों को
कोई शरमाया सा, कोई मुरझाया सा
और कोई मेहनत की चमक से चमकता हुआ।
वो देखो एक बच्चा मां की गोद में सिमटा
बाप चला रहा गाड़ी है
वो देखो महबूबा शर्माई,
आशिक ने छेड़ दिया हो जैसे
फैशन से लकदक दुनिया भी
गुलजार हो रही है सड़क पर
एक और दुनिया भी है यहीं
इस मॉल के सामने
जिसके हाथों में बस
आज पेट भर पाने की कमाई है
ये किसी एक शहर की नहीं, हर शहर की कहानी है
इसमें कुछ किस्से नए हैं
कुछ दास्तानें पुरानी हैं।

1 comment:

  1. हर शहर की कहानी को लिख दिया ...

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