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Saturday, December 7, 2013

प्रभुदेवा का रद्दी राजकुमार!

दो स्टार
प्रभुदेवा ने वॉन्टेड फिल्म के साथ बॉलीवुड में साउथ का तड़का लगाने की शुरुआत की। अब इसी अंदाज को वह एक बार फिर लेकर आए हैं फिल्म 'र... राजकुमार' के साथ। अब उन्हें कौन समझाए कि एक ही मसाला बार-बार परोसोगे तो ओवरडोज हो जाएगी।

फिल्म में शाहिद कपूर बने हैं रोमियो राजकुमार। राजकुमार किसी अंधेरी रात में एक गांव में पहुंच जाता है। वहां शिवराज (सोनू सूद) और परमार (आशीष विद्यार्थी) की दुश्मनी के चलते हालात बहुत खराब हैं। यहां पर राजकुमार को चंदा (सोनाक्षी सिन्हा) से प्यार हो जाता है। वहीं शिवराज भी चंदा को चाहता है। चंदा का प्यार पाने के लिए राजकुमार को क्या-क्या करना पड़ता है, यही फिल्म में दिखाया गया है।

प्रभुदेवा के स्टाइल में कुछ भी नया नहीं है। वही तीखा मसाला, तगड़ा एक्शन और कानफोड़ू संगीत। इन सबके चक्कर में कहानी की जमकर बैंड बजी है। फिल्म में गाने भी इतने ज्यादा हैं कि बची-खुची कहानी का भी दम घोंट जाते हैं।
साफ नजर आने लगा है कि प्रभुदेवा अपने ही फॉर्मूले के शिकार हो गए हैं। साउथ के स्टाइल में फिल्म को पेश करने के उनके अंदाज से अब दर्शक उकताने लगे हैं। शुरू के कुछ दृश्य जरूर फनी हैं, लेकिन इतने नहीं कि उनके लिए पूरी फिल्म देखी जाए। शाहिद का बार-बार किस के लिए मुंह बनाना भी इरिटेट करने लगता था। लॉजिक या दिमाग लगाने की बिल्कुल जरूरत नहीं। आलम यह है कि हीरो सिर्फ पैर हिलाता है और आठ-दस विलेन एक साथ हवा में उड़ जाते हैं। वहीं अकेले 60-65 लोगों को शाहिद को मारते देखना भी हजम नहीं होता।

जहां तक अभिनय की बात है तो यही एक चीज है जो फिल्म में नजर आती है। चाहे वह शाहिद कपूर हों या फिर सोनू सूद और आशीष विद्यार्थी, सभी ने अपनी तरफ से बेहतरीन कोशिश की है। कुछ दृश्यों में शाहिद ने इतना अच्छा अभिनय किया है कि उन्हें दाद देने को दिल करता है। हालांकि सोनाक्षी सिन्हा इसमें काफी पिछड़ी हुई हैं। सोनाक्षी को अब अपने अभिनय को कुछ नए रंग देने होंगे, अन्यथा लोग लुटेरा में उनके बेहतरीन काम को तुक्का ही मानेंगे। डायलॉग्स में भी कुछ नया नहीं है। हां, मध्य प्रदेश और गुजरात की लोकेशन को जरूर कैमरे ने अच्छे से कैद किया है।

इस फिल्म से भी काफी उम्मीदें थीं। खासतौर पर शाहिद कपूर और सोनाक्षी दोनों ने इसके जरिए अपने करियर में नई उछाल की संभावनाएं देखी होंगी, लेकिन अफसोस कि सभी को नाउम्मीद होना पड़ता है। फिल्म में हिंसा के दृश्य भी काफी ज्यादा हैं।

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