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Thursday, November 4, 2010

बस 'एक' मौत !

सभी पन्ने छोड़ने के बाद मैं फिर से एजेंसी चेक कर रहा था। एक घटना की खबर पर नज़र पड़ी और मैंने अपने डेस्क इंचार्ज से पूछा सर इस खबर को लगवाकर पन्ना फिर से छुडवा दें? उन्होंने पूछा कितने लोग मारे गए हैं? मैंने कहा सर एक लोग! सुनकर सर ने कहा, छोडो यार, एक ही आदमी तो मरा है। बात आई गयी हो गयी।
घर लौटते हुए मेरी गली में कुछ रोना सुनाई दिया। मैंने एक आदमी से पूछा क्या हुआ? उसने कहा एक आदमी मर गया है। उसीके गम में सब लोग रो रहे हैं। मरने वाले की बीवी, अलग... बेटा अलग और दूसरे घर वाले अलग। उनकी तो दुनिया ही उजाड़ गई थी। मेरे दिमाग में अपने सर की बातें घूमने लगीं। 'एक ही आदमी तो मरा है...'

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